छत्तीसगढ़बिलासपुर

बिलासपुर आबादी क्षेत्रो में फटाखो बेचने पर अंकुश कैसे लगेगा, कोई प्लान या सिर्फ खानापूर्ति हर साल की तरह?

दीपावली में आबादी क्षेत्रो में भारी मात्रा में फटाखो का व्यापार होता है?

बिलासपुर के इन आबादी क्षेत्रो में फटाखा विक्रय खपरगंज, जूनी लाइन, गाँधी चौक, व्यापार विहार।

(गोविन्द शर्मा की कलम से )

बिलासपुर :- दीपावली रौशनी का त्यौहार है समय के साथ इसे फटाखो के साथ भी जोड़ दिया गया और करोड़ो का व्यापार पुरे भारत वर्ष में शुरू हो गया यंहा तक तो बात ठीक है लेकिन इस कारोबार को किसी खुली जगह में होना चाहिए जहाँ आबादी नहीं हो, जान माल की हानि न हो लेकिन ऐसा होता कही दिखाई नहीं देता इसमें व्यापार करने वालो की लापरवाही तो है ही लेकिन जिन्हे रोकने की जिम्मेदारी दी गईं उनकी भी ज्यादा लापरवाही सामने आती है।

बिलासपुर में भी हर वर्ष शासन खुली जगह में फटाखो का व्यापार करने वालों को स्थान उपलब्ध कराती है जो एक प्रकार से सेफ्टी भी होती है लेकिन इसके अलावा शहर में आबादी वाले क्षेत्रो में भी भारी मात्रा में फटाखो का व्यापार किया जा रहा है जिसको रोकने की जिम्मेदारी भी प्रशासन, पुलिस की होती है जो अपनी क्षमता से कई गुना फटाखो को रखते है और उसे बेचते है ये सब प्रशासन और पुलिस के नाक के नीचे होता है और ऐसा भी नहीं कि इन्हे इन दुकानों, गोदामों का पता नहीं जहाँ आमनागरिक को पता है तो पुलिस और प्रशासन को पता कैसे नहीं होगा लेकिन मजाल है कोई इस को रोक पाए आखिर वजह क्या होंगी कि कार्यवाही करने कि जगह इनको खुली छुट् दी जाती है क्या प्रशासन कोई गंभीर हादसा का इंतजार कर रही है कि कोई दुर्घटना होंगी उसके बाद कार्यवाही करेंगे?

बिलासपुर के इन जगहों पर भारी मात्रा में होता है फटाखो का व्यापार :-

बिलासपुर के सबसे घनी आबादी वाला क्षेत्र खपरंगज, जूनी लाइन, गाँधी चौक, व्यापार विहार ऐसी न जाने बहुत सी जगह है जहाँ फटाखो का भारी मात्रा में व्यापार होता है प्रशासन, पुलिस को पता है इनको एक लिमिट में फटाखा रखने का लायसेंस मिला हुआ है लेकिन ये दीपावली के एक सप्ताह पहले से भारी मात्रा में स्टॉक अपनी क्षमता से अधिक रख कर पुरे क्षेत्र को दुर्घटना क्षेत्र में तब्दील कर देते है लेकिन इनको रोकने वाला कोई नहीं क्योंकि प्रशासन, पुलिस जानकारी होने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं करेगी क्योंकि प्रतिवर्ष ऐसा होता आ रहा है इस वर्ष भी ऐसा ही होगा।

अंत में यदि इन आबादी वाले क्षेत्रो में कोई गंभीर दुर्घटना होती है तो व्यापार करने वाले लोगो के साथ प्रशासन और पुलिस के उन अधिकारियो, कर्मचारियों पर भी कार्यवाही होंगी कि सिर्फ व्यापार करने वाले पर?

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