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MMGSY सड़क निर्माण में–पंडरीपानी स्कूल तक निर्मित की जा रही सड़क का ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप लगाए

MMGSY सड़क निर्माण में नियमों की उड़ रही धज्जियां? गुणवत्ता पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

ग्रामीणों ने सड़क की मोटाई, निर्माण सामग्री और गुणवत्ता मानकों में अनियमितता का लगाया आरोप; नई सीसी सड़क में दरारें दिखने से निष्पक्ष जांच की मांग तेज

घरघोड़ा (रायगढ) 10 जून 2026
छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना (MMGSY) राज्य के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आधारभूत विकास और बेहतर संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसी योजना के अंतर्गत घरघोड़ा क्षेत्र में संचालित सड़क निर्माण कार्य एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। मामला छाल रोड से तिलाईपाली–पंडरीपानी स्कूल तक निर्मित की जा रही सड़क का है, जहां ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है। आरोप है कि कई स्थानों पर यह कहकर कि नीचे पुरानी सड़क मौजूद है, सीमेंट कंक्रीट सड़क की मोटाई निर्धारित मानक के बजाय मात्र 4 इंच तक सीमित कर दी गई है।

गुणवत्ता और सामग्री पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार निर्माण कार्य में उपयोग किए जा रहे मटेरियल की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है। उनका आरोप है कि बेस लेयर में गिट्टी, फाइन एग्रीगेट (मरम) तथा फ्लोर गिट्टी का निर्धारित अनुपात नहीं रखा जा रहा है। साथ ही छोटी गिट्टी का उपयोग भी बेहद कम या लगभग नगण्य बताया जा रहा है, जिससे सड़क की मजबूती और टिकाऊपन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

तकनीकी मानकों को लेकर बढ़ी चिंता

जानकारों के अनुसार मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना अथवा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़क की कुल संरचनात्मक मोटाई (बेस लेयर से लेकर सतही परत तक) मिट्टी की प्रकृति, यातायात के भार तथा स्वीकृत डिजाइन पर निर्भर करती है। सामान्यतः यह मोटाई लगभग 30 से 45 सेंटीमीटर (12 से 18 इंच) तक रखी जाती है। ऐसे में यदि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों से कम मोटाई या गुणवत्ता का उपयोग किया गया है, तो इसकी तकनीकी जांच आवश्यक हो जाती है।

नई सड़क में दरारें, निरीक्षण व्यवस्था पर प्रश्न

ग्रामीणों का दावा है कि निर्माणाधीन अथवा हाल ही में बनी सीसी सड़क के कुछ हिस्सों में अभी से दरारें (क्रैक) दिखाई देने लगी हैं। उनका कहना है कि यह स्थिति निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। साथ ही निरीक्षण एवं गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

अधिकारी और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर संदेह

ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे अधिकारियों तथा संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि वास्तव में सड़क की मोटाई कई स्थानों पर 4 इंच ही रखी जा रही है, तो भुगतान किस मानक के आधार पर किया जाएगा, इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

विशेषज्ञों की राय

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार सड़क निर्माण में निर्धारित मोटाई, गुणवत्तापूर्ण सामग्री, उचित संपीड़न (कम्पेक्शन) तथा स्वीकृत तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य होता है। इनमें किसी भी प्रकार की कमी सड़क की आयु को प्रभावित कर सकती है तथा भविष्य में सड़क के शीघ्र क्षतिग्रस्त होने का कारण बन सकती है।

जांच की मांग तेज

छाल रोड से तिलाईपाली–पंडरीपानी स्कूल तक बन रही MMGSY सड़क को लेकर सामने आए आरोपों के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि गुणवत्ता से समझौता किया गया तो इससे न केवल सरकारी धन के सदुपयोग पर प्रश्न उठेंगे, बल्कि क्षेत्रीय विकास और आम जनता की सुविधाएं भी प्रभावित होंगी।