
तिफरा क्षेत्र के सेक्टर डी इलाके में बिना नगर निगम परमिशन के अवैध प्लाटिंग के लिये रास्ता बनाया गया शिकायत के बाद भी कार्यवाही शून्य।
जोन कमीश्नर भूपेंद्र उपाध्याय को रोड बनने से पूर्व शिकायत के बाद भी सिर्फ नोटिस काट कर खानापूर्ति कर दीगई और उसके बाद रोड भी बन गई।
बिलासपुर नगर निगम के अंतर्गत आने वाले तिफरा क्षेत्र के ज़ोन क्रमांक 02 के सेक्टर डी इलाके में अवैध प्लोटिंग और अवैध सड़क निर्माण की शिकायत नगर निगम के ज़ोन क्रमांक 02 के कमिश्नर भूपेंद्र उपाध्याय से की गई थी. 27 मार्च की सुबह जब ये शिकायत की गई थी तब अवैध प्लोटिंग में जाने के लिए अवैध सड़क बनाने का कच्चा माल डंप किया जा चुका था तमाम विडियो फुटेज के साथ निगम के अधिकारीयों को इसकी शिकायत की गई. उसी दिन निगम की तरफ से लक्ष्मी नारायण, राजकुमार गुप्ता, राजेंद्र कुमार और दिलहरण नाम के चार लोगों के नाम से नोटिस जारी कर दिया गया था. लेकिन निगम का ये नोटिस केवल खानापूर्ति ही मात्र ही बन कर रह गया. क्योंकि अवैध निर्माण करने वालों के हौसले इतने बुलंद हैं कि निगम के नोटिस का भी उनपर कोई असर नहीं पड़ा. निगम के नोटिस को इस तरह दरकिनार करने के साहस की दो वजहें हो सकती हैं एक तो ये कि अवैध निर्माण करने वाले लोग बिलासपुर नगर निगम के अधिकारीयों को कुछ समझते ही नहीं हैं उनकी ज़रा भी इज्ज़त नहीं करते उनको ठेंगा दिखाते हैं कि जो नोटिस जारी करना है करते रहो हमको कोई फर्क नहीं पड़ता…या दूसरी वजह शायद ये भी हो सकती है कि क्या पता निगम के ही कुछ लोगों ने उन्हें ऐसी छूट दे रखी हो कि हम नोटिस नोटिस खेलते रहेंगे और तुम अपना काम करते रहना. बहरहाल तिफरा क्षेत्र के ज़ोन क्रमांक 02 के सेक्टर डी इलाके में फल फूल रहे अवैध निर्माण के पीछे दुस्साहस या मिलीभगत, वजह जो भी हो पर इससे निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल ज़रूर उठ रहे हैं.
विडियो फुतेज़ में आप देख सकते हैं. ये तब की स्थिति है जब अवैध सड़क बनाने के लिए मुरूम डंप किया गया था. इसी स्थित में निगम को इस अवैध निर्माण की शिकायत की गई थी और निगम ने नोटिस जारी किया था. अब ये जो विडियो आप देख रहे हैं उसमें सड़क पूरी तरह बन चुकी है सड़क निर्माण में लगे भारी वाहन भी विडियो में नज़र आ रहे हैं. तो क्या ये समझा जाए कि अवैध निर्माण करने वाले लोग निगम पर भारी पड़ रहे हैं. या फिर निगम इंतज़ार कर रहा है कि पहले मुरुम की अवैध सड़क बने, फिर डामर की अवैध सड़क बने, फिर वहां अवैध प्लोटिंग भी हो जाए उसके बाद जो कार्रवाई होगी शायद वो निगम के लिए ज़्यादा लाभ पहुचाने वाली साबित होगी. हालाँकि निगम के अभिकारियों ने इस मामले में कार्रवाई की बात कही है अब देखना होगा कि ये कार्रवाई कब और कितनी सख्त होती है.
