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हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम…
वो कत्ल भी करते हैं पर चर्चा नही होती… (वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडेय जी की कलम से)

हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम…
वो कत्ल भी करते हैं पर चर्चा नही होती…

छग में राजनीतिक सियासत पर लगता है कि कांग्रेस आलाकमान ठोक बजाकर ही फैसला लेने के मूड में है…? सीएम भूपेश बघेल से करीब 3 घंटे से अधिक लंबी चर्चा के बाद लगता है कि राहुल, बाबा साहब से भी बातचीत कर कोई बीच का रास्ता निकालना चाहते हैं, वैसे यह तो तय है कि छग के सांसद, विधायक तथा मंडल, निगम के नेताओं की दिल्ली में मौजूदगी से “प्रेशर पालिटिक्स” में फिलहाल सफलता मिलती दिख रही है…? राहुल, प्रियंका, वेणु गोपाल तथा पी एल पूनिया की बैठक के बाद भूपेश ने कहा कि हमने अपनी बात रख दी है अगले सप्ताह राहुल गांधी छग प्रवास पर आ रहे हैं…वे छग के विकास कार्यों को भी देखेंगे….? मैंने राहुल जी को बतौर सीएम ही आमंत्रित किया है। इधर समस्या यह है कि अगले विस चुनाव तक बाबा साहेब (जन्म 31अक्टूबर1952)70 साल के हो जाएंगे और कांग्रेस की छग में सरकार फिर बनती है तो उनका सीएम बनना संभव नही है…,,,?पिछले विधानसभा चुनाव में अंगद के पांव की तरह जम चुकी भाजपा की रमन सरकार को पदच्युत कर कांग्रेस की सरकार बनाने में जय, वीरू की जोड़ी की महत्वपूर्ण भूमिका थी, पर सरकार बनने के बाद भूपेश बघेल, टी एस सिंहदेव की जोड़ी में में कुछ दूरियां बढ़ गई हैं… दरअसल सिंहदेव वित्त मंत्रालय चाहते थे पर वह विभाग बघेल ने अपने पास रख लिया…? बाद में ढाई, ढाई साल के मुख्य मंत्री का मसला छाया हुआ है…,? एक कांग्रेस के विधायक वृहस्पत सिंह द्वारा सिंहदेव पर हत्या कराने का आरोप, फिर खेद जताना, अंबिकापुर में राजीव कांग्रेस भवन में दो बार फीता काटा जाना भी चर्चा में रहा… पिछले दिनों ही राहुल गांधी द्वारा भूपेश, सिंहदेव, छग प्रभारी पुनिया के साथ 3 घंटे की बैठक लेना, फिर बैठक के बाद छग के विकास चर्चा की बात कुछ गले नही उतर रही थीं… यदि छग के विकास पर ही राहुल को बातचीत करना था तो कुछ प्रमुख नेताओं को नही बुलवाना भी समझ के परे रहा.. खैर दिल्ली मीटिंग के बाद भूपेश रायपुर लौट गए हैं, विमानतल पर उनका स्वागत उस पल की याद ताजा कर गया जब भूपेश 2018 में छग का सीएम बनकर लौटे थे… उनके पिछली बार लौटने पर नारा भी चर्चा में रहा…” छत्तीसगढ अड़ा है, भूपेश खड़ा है…” वैसे भूपेश बड़े बेफिक्र भी दिखाई दे रहे थे, पर बाद में उन्हें आलाकमान ने पुन: बुलवाया था हालांकि बाबा साहब दिल्ली में ही रुक गए थे। बहरहाल छग कांग्रेस में यदि मनभेद या मतभेद हैं तो उसे तुरंत दूर करना जरुरी है… क्योंकि अगले विस चुनाव को करीब 2साल ही बचा है… 25सालों तक सत्ता का स्वाद चखने वाली भाजपा ने तो अभी से अपनी चुनावी तैयारियां शुरु भी कर दी है…..

कांग्रेस के 70 साल बनाम मोदी सरकार…

लगभग 70 सालों तक कांग्रेस ने भारत में राज किया, भाजपा का सीधा आरोप रहता है कि एक ही परिवार नेहरू, गांधी ने आखिर देश के लिए क्या किया….. भारत, पाक विभाजन, कश्मीर के हालात के लिए नेहरू ही ज़िम्मेदार है….? इधर राहुल गांधी ने भी सीधा मोदी सरकार पर आरोप है कि जो देश की संपत्तियों को मोनेटाइजेशन/निजीकरण के नाम पर अपने कुछ लोगों को बेच रही है वह संपत्तियां कांग्रेस काल की ही धरोहर है…! हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने देश की संपत्तियों को निजीकरण के नाम पर बेचने/ लीज में देने की बात की है जाहिर है कि यह योजना नरेंद्र मोदी की ही है, खैर इस योजना की जमकर चर्चा है…?
नरेद्र मोदी सरकार 5.96 लाख करोड़ रुपये में देश की कुछ संपत्तियों को बेचने जा रही है। 25 हवाईअड्डे,26,700 किलोमीटर राजमार्ग, पनबिजली और सौर बिजली संयंत्र,कोयला खदान की 160 परियोजनाए,8,154 किलोमीटर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन ,2.86 लाख किलोमीटर टेलीकॉम फाइबर ,14,917 टेलीकॉम टॉवर , 210 लाख मीट्रिक टन क्षमता के तमाम गोदाम , 400 रेलवे स्टेशन और भी कई सरकारी संपत्तियां और जमीनें …?
यह सब पिछले 70 साल में बना था। खासकर एयरपोर्ट, नैशनल हाइवे, गैस पाइपलाइन, फाइबर और गोदाम मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल के बने हुए हैं। देश के तमाम नागरिकों को लगता है कि पिछले 70 साल में कुछ नहीं हुआ। लेकिन यह मोदी सरकार तो 7सालों में देश को कहां ले गई है…. अभी तो देश में हजारों की संख्या में शोध संस्थान, विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज हैं, लाखों की संख्या में डिग्री कॉलेज हैं, लाखों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक विद्यालय हैं, जिन्हें बर्बाद करके बेचा जा सकेगा….। आपके मोहल्ले और गलियां हैं, जिनमें सड़कें व पार्क पहले की सरकारों ने बनवाए हैं, बिकनेे के बाद वहां भी एक टोल प्लाजा बन जाएगा तो आश्चर्य नही होगा….?

छग की पुलिस और पद ……

छग में डीएम अवस्थी डीजीपी हैं तो स्पेशल डीजी के पद पर संजय पिल्ले, आर के विज, अशोक जुनेजा पदस्थ हैं… दो एडीजी मुकेश गुप्ता, जीपी सिंह निलंबित हैं, बल्कि सिंह तो फरार चल रहे थे, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत दे दी है….
वैसे केन्द्र सरकार के गृहमंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ पसर्नल एण्ड ट्रेनिंग नई दिल्ली 19 मई 2017 के अनुसार तो छत्तीसगढ़ में 2 डीजी के पद है एक है पुलिस महानिदेशक का तथा दूसरा स्वीकृत पद है डीजी ट्रेनिंग और डायरेक्टर स्टेट पुलिस अकादमी… यानि डीजी जेल/होमगार्ड का पद ही स्वीकृत नहीं है। जाहिर है अभी जो स्पेशल डीजी संजय पिल्ले/आर.के. विज जहां पदस्थ हैं वह पद स्वीकृत नहीं है पर अफसरों की पदोन्नति होती गई और पद स्वीकृत राज्य स्तर पर होते गये। छत्तीसगढ़ में डीजीपी, डीजी ट्रेनिंग और डायरेक्टर पुलिस अकादमी के ही पद केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकृत है। एक कॉडर एक नान काडर डीजी का पद है। वर्तमान में डीजीपी के पद पर डीएम अवस्थी काबिज हैं तो स्पेशल डीजी के पद पर संजय पिल्ले, आर के विज और अशोक जुनेजा पदस्थ हैं… केन्द्र सरकार के गृहमंत्रालय द्वारा इस पद पर आईजी की तैनाती होनी चाहिए, उसी तरह गुप्तवार्ता प्रमुख का पद एडीशनल डायरेक्टर जनरल (एडीजी) का ही स्वीकृत हैं। इस पद पर आईजी छाबड़ा पदस्थ हैं तो एसीबी में आईजी का पद स्वीकृत है वहां डीआईजी स्तर के आरिफ शेख पदस्थ हैं… तो एक आईजी दीपांशु काबरा परिवहन विभाग में प्रतिनियुक्ति पर हैं…वहीं जेल/होमगार्ड में भी एडीशनल डीजी (एडीजी) का पद ही स्वीकृत हैं।
वैसे छत्तीसगढ़ में एक डीजीपी तथा एडीजी ट्रेनिंग/संचालक पुलिस अकादमी को छोड़कर बाकी सभी पद एडीजी स्तर के हैं पर 30 साल की नौकरी पूरी होती रही या 30 साल की नौकरी पूरी होने के पहले (ए.एन. उपाध्याय का उदाहरण) डीजी बनते रहे और उनके साथ के लोगों को डीजी बनाया जाता रहा और स्पेशल डीजी की भरमार हो गई। अभी की स्थिति में डीजीपी डीएम अवस्थी के साथ संजय पिल्ले, आर.के. विज, मुकेश गुप्ता (निलंबित), अशोक जुनेजा डीजी स्तर के अफसर हैं वैसेअभी एडीजी स्तर दोअफसर मुकेश गुप्ता,जी पी सिंह निलंबित है…. तो एक एडीजी कल्लूरी पता नही क्या काम देख रहे हैं, एक एडीजी पवन देव पुलिस हाउसिंग का काम देख रहे हैं।वहीं हाल फिलहाल एडीजी पदोन्नत विवेकानंद सिन्हा आईजी भिलाई रेंज का ही काम ही देख रहे हैं… एडीजी की भी बाढ़ सी आ गई है जबकि केंद्र सरकार के राजपत्र असाधारण 19 मई 2017 के अनुसार स्वीकृत पद एडीजी गुप्तवार्ता, प्रशासन, वित्त एवं योजना, सीएएफ, जेल एवं होमगार्ड, सीआईडी/ एजेके/विजिलेंस तथा एडीजी ओपीएस/एसआईबी/एसटीएफ ही हैं। इधर आईजी रेंज बिलासपुर, सरगुजा तथा बस्तर में डीआईजी को प्रभारी बनाया गया है तो ओ पी पाल की आईजी पदोन्नति लंबित है… कुछ जिलों में डीआईजी स्तर के अफसर एसपी का काम सम्हाल रहे हैं…. हाल ही में 4 नए जिले बनने वाले हैं वहां भी चार एसपी को पदस्थ करना ही पड़ेगा…..

परिवहन में पुलिस का दखल बढ़ा……

छग के परिवहन विभाग में वर्चस्व की लड़ाई शुरु हो गई है, दरअसल परिवहन विभाग का मुखिया आईपीएस अफसर होता हैं और उनके नीचे भी पुलिस अफ़सर प्रतिनियुक्ति पर आते हैं, अभी तक तो ठीक ठाक चल रहा था पर एक डीएसपी स्तर के अफसर आजकल फूलफार्म में हैं, जाहिर है कि उन्हें ऊपर के अफसरों का भी समर्थन होगा… उनके सही / गलत आदेश से परिवहन विभाग के मूल अधिकारी,/कर्मचारी परेशान है…. अब तो धमकी, चमकी की भी शुरुवात हो चुकी है, वैसे परिवहन मंत्री तक शिकायत पहुंच चुकी है..

और अब बस…

0राहुल गांधी की बैठक में नक्सली प्रभावित बस्तर में पुलिस फायरिंग से ग्रामीणों की मौत तथा सीएमओ के अफसरों की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा हुई….
0छग काडर के अमित कटारिया भी भारत सरकार में ज्वाइंट सेक्रेटरी हो गए हैं, इनके अलावा विकाश शील, निधि छिब्बर, ऋचा शर्मा, सुबोध सिंह, सोनमणी वोरा तथा रोहित यादव पहले ही ज्वाइंट सेक्रेटरी हो चुके हैं।
0छग की राजधानी रायपुर का रेल्वे स्टेशन की भी कीमत 600करोड़ आंकी गईं है।

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