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दर्पण में आंखें बनी, दीवारों में कान…
चूड़ी में बजने लगी , अधरों में मुस्कान… (शंकर पांडेय)

दर्पण में आंखें बनी, दीवारों में कान…
चूड़ी में बजने लगी , अधरों में मुस्कान… (वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडेय)

झीरम जांच आयोग की रिर्पोट को लेकर छग में राजनीति तेज है। आयोग की रिर्पोट राज्यपाल को सौंपना, कुछ दिनों बाद राज्यपाल द्वारा रिर्पोट को राज्य शासन को सौंपना, राज्य सरकार के मंत्री रविन्द्र चौबे द्वारा रिर्पोट खुली होने, लीक होने का आरोप, राज्यपाल द्वारा खुली ही रिर्पोट मिलने, रिपोर्ट नही पढ़ने आदि चर्चा में है। राज्यपाल का कहना है कि उन्होंने विधि सलाहकार से बात करके रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है यदि आयोग की रिपोर्ट लेने के पहले ही विधि विभाग से सलाह ले ली जाती तो इस विवाद को टाला जा सकता था…..? बहरहाल राज्य सरकार द्वारा आयोग में 2 सदस्यों की नियुक्ति की गई है । ये ही रिपोर्ट पूरी करके सरकार को सौंपेंगे। राज्य सरकार की बात में दम तो है कि एक तरफ आयोग रिपोर्ट पूरी नही होने पर और समय चाह रहा था …और इसी बीच शासन की जगह राज्यपाल को अपनी रिपोर्ट सौंप देता है। खैर इस मामले में राज्यपाल का कहना है कि जब रिपोर्ट मुझे मिली और मैंने सरकार को भेजी तो लीक कैसे हुई…..छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके ने झीरम काण्ड को लेकर जांच आयोग की रिपोर्ट पर एक बड़ा बयान दिया है। उइके ने कहा कि मैं कोई पोस्टमेन तो नहीं, जो यहां से रिपोर्ट लेकर वहां पहुंचा दूं। आयोग की रिपोर्ट जब मुझे सौंपी गई, तो मैंने उसे अपने लीगल एडवाइजर से पूछा, उन्होंने बताया कि रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जाए और मैंने सरकार को रिपोर्ट सौंप दी।
झीरम घाटी आयोग की रिपोर्ट हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने पिछले दिनों राज्यपाल अनुसुइया उइके को सौंपी थी। उसके बाद से ही लगातार इस मामले में पक्ष विपक्ष आमने-सामने हैं और दोनो एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

सीएस/डीजीपी पहले डीएम, एसपी भी एक साथ रह चुके हैं….

छत्तीसगढ में बतौर कलेक्टर/एसपी की जोड़ी चर्चा में थी, बिलासपुर और रायपुर में साथ साथ काम करने वाले आर पी मंडल तो बाद में मुख्य सचिव बन गए पर उनके साथ काम करने वाले एसपी अशोक जुनेजा उनके साथ डीजीपी नही बन सके थे पर अब वे डीजीपी बन गए हैं। पर कई लोगो को शायद यह पता नही होगा कि वर्तमान मुख्य सचिव अभिताभ जैन के साथ डीजीपी जुनेजा अविभाजित मप्र के राजगढ़ में एक साल काम कर चुके हैं। 1997में बतौर कलेक्टर/एसपी की जिम्मेदारी दोनो सम्हाल चुके हैं उस समय एमपी के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह थे।कम से कम गुना और राजगढ़ में तो दिग्गी राजा के पसंद के अफसर पदस्थ होते थे। जाहिर है की छग में सीएस /डीजीपी मेंअच्छा तालमेल होगा क्योंकि दोनो एक दूसरे को समझते हैं। दोनो अफसर 89बैच के हैं तो प्रदेश के तीसरे तथा दोनो से वरिष्ठ अफसर आईएफएस राकेश चतुर्वेदी हैं। वन विभाग के सुप्रीमो राकेश 1985 बैच के हैं यानि दोनो अफसरों (सीएस/डीजीपी ) से 4 साल वरिष्ठ हैं। वे अविभाजित एमपी में छग से पहले आईएफएस हैं।वैसे अभिताभ रायपुर के कलैक्टर रह चुके है तो जुनेजा रायपुर के एसएसपी….मुख्यसचिव के रूप में विनम्र अच्छे वित्त प्रबंधक, अनुशासनप्रिय, काम से काम रखने वाले, ईमानदार छवि के अमिताभ जैन की प्रारंभिक स्कूली पढ़ाई, दल्ली राजहरा से ही हुई, आईएएस के रूप में उनकी पहली पदस्थापना बतौर असिस्टेण्ट कलेक्टर जबलपुर में हुई थी वे राजगढ़, छतरपुर तथा होशंगाबाद में कलेक्टर भी रह चुके हैं वहीं रायपुर में भी 2 बार कलेक्टर रहे। एक बार मंडल को रायपुर कलेक्टर के पद से हटाकर चुनाव कराने की जिम्मेदारी अमिताभ को दी गई थी। रायपुर कलेक्टर होकर मुख्य सचिव बनने वाले वे छत्तीसगढ़ के तीसरे अफसर बन चुके हैं। अशोक जुनेजा 1989 बैच के आईपीएस अफसर हैं. उन्होने आईपीएस का प्रशिक्षण रायपुर में ही लिया। काम से काम रखने वाले अनुशासनप्रिय तथा ईमानदार छवि के जुनेजा छग के रायगढ़ में एडिशनल एसपी और बिलासपुर में एसपी रहे हैं. उसके बाद दुर्ग और रायपुर में एसएसपी रहे हैं. फिर बिलासपुर और दुर्ग संभाग के आईजी भी रहे. जुनेजा करीब ढाई साल तक खुफिया चीफ भी रह चुके हैं. जुनेजा की पुलिस से संबंधित सभी विभाग का दायित्व सम्हाल चुके हैं. उन्हें मंत्रालय में भी गृह सचिव की जिम्मेदारी मिली थी. इसके साथ ही वे खेल विभाग की भी बड़ी जिम्मेदारी निभा चुके हैं. उन्हें परिवहन विभाग में एडिशनल कमिश्नर भी बनाया जा चुका है. इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय में खुफिया के साथ सशस्त्र बल, प्रशासन, ट्रेनिंग विभाग भी संभाल चुके हैं. इसके अलावा जुनेजा सेंट्रल में डेप्यूटेशन के तौर पर सेवा दे चुके हैं. दो साल तक वे दिल्ली में नारकोटिक्स विभाग में भी रहे. अशोक जुनेजा नक्सल ऑपरेशन की भी कमान संभाल चुके हैं. अभी वर्तमान में वह नक्सल ऑपरेशन के डीजी के तौर पर काम कर रहे हैं।

5 राज्यों में चुनाव और……

विवादास्पद कृषि कानून वापस लेने की पीएम मोदी की घोषणा और पेट्रोल और डीजल की दीपावली से ऐन पहले इन पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में क्रमश: 5 रुपये और 10 रुपये प्रति लीटर कटौती की। इससे लोगों को तत्काल कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन सरकार के इस कदम का वैसा उत्साहपूर्ण स्वागत नहीं हुआ, जैसी उम्मीद की जा रही थी। कारण संभवत: यह है कि आम लोगों के लिए इस फैसले को सरकार की संवेदनशीलता से जोड़कर देखना संभव नहीं हो पा रहा।पिछले काफी समय से पेट्रोल और डीजल की कीमतों का लगातार बढ़ता बोझ आम लोगों के लिए जीना मुश्किल किए हुए था।सरकार का यह फैसला 29 विधानसभा सीटों और 3 लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे घोषित होने के बाद आया है, जिन्हें कांग्रेस के लिए उत्साहवर्धक और बीजेपी के लिए चिंताजनक माना गया। स्वाभाविक ही इससे यह संदेश गया कि बीजेपी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत 5 राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है। एक साल से किसान तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। पर पीएम ने कभी चर्चा करना भी उचित नही समझा और अचानक ही कृषि कानूनों की वापसी की बात पी एम ने की ।ताजा फैसला आगामी 5 राज्यों की चुनावी चिंता से उपजा है…..? इधर यह माना गया कि इन राज्यों में चुनाव होते ही पेट्रोल और डीजल के भाव फिर ऊपर का रुख कर लेंगे?दूसरी बात यह कि पिछले कुछ समय में इनके दाम में जो असाधारण बढ़ोतरी हुई है, उसके मुकाबले यह कटौती बहुत कम है। 2021 की ही बात करें तो साल की शुरुआत से अब तक पेट्रोल और डीजल के भाव करीब 28 रुपये और 26 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए जा चुके हैं। इस मुकाबले 5 रुपये और 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती को राहत माना भी जाए तो कैसे? खासकर तब, जब इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों से ज्यादा बड़ी भूमिका एक्साइज ड्यूटी की हो।
ताजा कटौती के बाद भी पेट्रोल पर 27.90 रुपये और डीजल पर 21.80 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लगती है, जो पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान लगने वाली ड्यूटी के मुकाबले बहुत ज्यादा है। हालांकि आज के हालात और चुनौतियों की तुलना पिछली सरकारों के कार्यकाल से नहीं की जा सकती। लेकिन पेट्रोल और डीजल के ऊंचे भाव न केवल शहरों और गांवों के आम वाहनधारकों को प्रभावित करते हैं बल्कि फसलों की सिंचाई और माल ढुलाई का खर्च बढ़ाकर आम तौर पर महंगाई का स्तर बढ़ा देते हैं। इसलिए जरूरी है कि सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम में और कमी लाने पर विचार करे।

और अब बस…

0 छग के डीजीपी पद से डीएम अवस्थी की छुट्टी हो गई, वहीं उनके एक करीबी रिश्तेदार को नई जिम्मेदारी मिली है जो कई दिनों से लूप लाइन में थे।
0 किसानों की बड़ी जीत,किसानों का संघर्ष काम आया। पीएम मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया। सवाल यह है कि शहीद किसानों की मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा..?
0 कोरबा के एसपी , मूल छत्तीसगढ़िया अफसर भोजराम पटेल ने अपनी समस्या लेकर गए 88 साल के एक बुर्जुग के भूखे होने की जानकारी मिलने पर पहले उसे भरपेट नाश्ता कराया और उसके बाद उसकी समस्या सुनी। यह अन्य अफसरों के लिए एक सीख हो सकती है।
0एक रिटायर अफसर के मीडिया समूह ज्वाइन करने की भी जमकर चर्चा है।
050लाख के इनामी नक्सली मिलिंद तेलतुम्बडे की मुठभेड़ में मौत के बाद सुरक्षा बल उत्साहित हैं।
0नक्सली नेता आर के की बस्तर में मिली डायरी के आधार पर एनआईए ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 14 ठिकानों में छापेमारी की,नक्सल मददगारों के कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे…..?

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