छत्तीसगढ़बिलासपुर

जब तक हड्डियों पर माँस है…जीवन में चील- कौओं का उत्पात रहेगा…! क्या पैराशूट विधायक के बाद पैराशूट अध्यक्ष भी बनाया जाएगा???

जब तक हड्डियों पर माँस है…जीवन में चील- कौओं का उत्पात रहेगा…! क्या पैराशूट विधायक के बाद पैराशूट अध्यक्ष भी बनाया जाएगा???

वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेश दुबे (टाटा) की कलम से:-

(गोविन्द शर्मा पत्रकार)


बिलासपुर :- पर्यवेक्षकों के समक्ष दावेदारी किए बिना नाम चलना पर्यवेक्षकों का अपमान नहीं है,क्या कोई व्यक्ति पार्टी संगठन से ऊपर हो सकता है और यदि उसे ऊपर है तो शिखर नेतृत्व द्वारा पार्टी संगठन को अत्यधिक मजबूत बनाने हेतु पर्यवेक्षकों की मेहनत एवं ईमानदारी से किए गए कार्यकर्ताओं की रायशुमारी का क्या होगा??
यदि पार्टी संगठन में भी पैराशूट उतार दिए जाएंगे तो गुब्बारा तो फूटेगा ही पार्टी संगठन को भारी नुकसान भी होगा पैराशूटो को टिकट दिए जाने की मजबूरी हो सकती है पर संगठन में पद दिया जाना कमजोरी सिद्ध होगी यदि लोगों में पर्यवेक्षकों के समक्ष उनके नाम की इतनी अत्यधिक चर्चा थी तो उन्हें अपने नाम का आवेदन विधिवत करना चाहिए था ना की पर्यवेक्षकों के साथ-साथ कार्यकर्ताओं का अपमान करते हुए अलग से नाम चलाए जाने का,
शिखर नेतृत्व बेहद गंभीर है पार्टी संगठन की मजबूती को लेकर जिसने पार्टी में पीढ़ी दर पीढ़ी सेवा दी होगी उसे उसे दर्द का एहसास होगा “हमारे आपसे बड़ा संगठन होता है हम मिटाते हैं तब संगठन खड़ा होता है” संगठन की पीड़ा दर्द का एहसास आम कार्यकर्ताओं को होगा ना की चंद दिनों पहले सीधे पैराशूट से उतरे व्यक्ति को ,सत्य जानकर भी असत्य के प्रति गहरा लगाव,मानसिक ग़ुलामी का संकेत है, जो सच्चे कांग्रेसियों में कतई नहीं हो सकता पार्टी संगठन के लिए जरूरी है ग्रास रूट ना कि पैराशूट!

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