छत्तीसगढ़बिलासपुर

करोड़ो की बेसकीमती जमीन विवाद में कोर्ट ने पूजा खनुजा की अपील को ख़ारिज किया?

बिलासपुर में जमीन सौदे पर कोर्ट का कड़ा रुख: सिरगिट्टी की 1.88 एकड़ जमीन के ट्रांसफर पर रोक बरकरार, पूजा खनूजा की याचिका खारिज

बिलासपुर: करोड़ों की बेसकीमती जमीनों के हेरफेर और विवादों पर बिलासपुर जिला न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। सिरगिट्टी क्षेत्र स्थित 1.88 एकड़ कृषि व आबादी भूमि के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद में नवम् जिला न्यायाधीश अगम कुमार कश्यप की अदालत ने पूजा खनूजा को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने विचारण न्यायालय के स्थगनादेश (Stay Order) को सही ठहराते हुए पूजा खनूजा की अपील को पूरी तरह सारहीन मानकर खारिज कर दिया।

मामले के मुख्य बिंदु

  • विवादित रकबा व खसरा: सिरगिट्टी स्थित खसरा नंबर 636/5, 866, 863, 872 और 873/2 की कुल 1.88 एकड़ भूमि।
  • वादी पक्ष का दावा: हितेश मटरेजा व अन्य का आरोप है कि यह उनकी पैतृक संपत्ति है, जिसमें उनका आधा हिस्सा है। प्रतिवादी लखबीर सिंह उर्फ राजा ने कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए पहले जमीन अपने नाम कराई, फिर भावना शर्मा को बेची। बाद में भावना शर्मा ने दानपत्र (Gift Deed) के जरिए इसे पूजा खनूजा के नाम ट्रांसफर कर दिया।
  • प्रतिवादी पक्ष का तर्क: पूजा खनूजा की ओर से दावा किया गया कि यह भूमि रामरखी बाई की स्व-अर्जित संपत्ति थी, जिसे उन्होंने 1998 में वसीयत के जरिए लखबीर सिंह को दिया था और आगे की पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से वैध है।

‘मुकदमे के बीच तीसरे पक्ष का हित पैदा करना गलत’ — अदालत की अहम टिप्पणी

​न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब मामला पैतृक संपत्ति के विवाद और हिस्सेदारी से जुड़ा हो, तब मुकदमा लंबित रहने के दौरान किसी तीसरे पक्ष (Third Party) के पक्ष में नया हित पैदा करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा:

“अस्थायी निषेधाज्ञा (Injunction) का मुख्य उद्देश्य मुकदमों की बाढ़ को रोकना, विवादित संपत्ति की यथास्थिति बनाए रखना और अंतिम फैसले तक दोनों पक्षों के कानूनी अधिकारों की रक्षा करना है।”

​अदालत ने 19 मार्च 2025 को जारी स्थगनादेश में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार करते हुए मूल प्रकरण की फाइल आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित विचारण न्यायालय को तुरंत वापस भेजने का आदेश दिया है।